Ek Shayar ka Safar

Hello friends.This blog is Ek Shayar ka safer.Manzil is life,Target, Vision, Aim. Without motivation, inspiration we cant get target.So i will try my best to write more Inspirational , Motivational words. Through which reader come out from depression and they have to eager to spend a enjoy full life.So please join it and put your comments. Ye aap sab ki manzil ka hai safar, Ye badhte kadmo ki hai ek dagar, Ab zindagi ko banalo hamsafar, Jaan lo ye Ek Shayar ka hai safar...........

Thursday, January 28, 2010

koshis


मंजिल दूर दिखती हैं पर पहुचने की कोशिस करों,
मुश्किलें बहुत होती हैं पर हटाने की कोशिस करों,
होसला कम ना होने दो उसे हासिल करने की कोशिस करों,
उम्मीद ख़तम ना होने दो हकीकत में बदलने की कोशिस करों !

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Maya MAnzil
maya.manjil@gmail.com

chahat


खयालो को हकीकत में बदलने की चाहत हैं,
राही को मंजिल तक पहचाने की चाहत हैं,
कांटो को फूलो में बदलने की चाहत हैं ,
वक़त को अपने काबू में करने की चाहत हैं,
जो कह दिया उसे कर दिखाने की चाहत हैं!

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Maya Manzil
maya.manjil@gmail.com

chunoti


मालूम नहीं मेरा होसला कब तक हैं,
मंजिल में ना जाने राही कब तक हैं,
मंजिल और राही साथ में जब तक हैं,
मेरी जिन्दगी की ये चुनोती तब तक हैं!

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Maya Manzil
maya.manjil@gmail.com

Khud Ki Pahachan


खुद की पहचान के लिए हमने जतन अकेले किया,
लाखो की भीड़ में हमने खुद को अकेले पाया,
हुआ कुदरत का ये करिश्मा एक फरिस्ता हमने पाया,
राही को मंजिल पहुचने तक साथ उसने दिया!

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Maya Manzil
maya.manjil@gmail.com

Vo Vapha Ki Rasam


वो वफ़ा की रसम क्या मुझसे निभाने निकला ,
मेरा ही दर्द था जो मुझको रुलाने निकला,
वो हर कदम पे क्या मेरा साथ निभाने निकला,
मेरी ही परछियाँ थी , जो मंजिल तक सहारा निकला!

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वो कहते है की वो मुझे जानते है ..
वो जानते है की या अनजान बनते है
इस गुलिस्तान में एक है जो पहचानते है .
हम उनका ही फ़साना गुन्गुनानते रहते है !

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Maya Manzil
maya.manjil@gmail.com

Ummid Aisi Ho


Ummid aisii ho jo Jine ko majaboor kare ,
raah aisi ho jo chalane ko majaboor kare ,
hosala aisa ho jo badne pe majaboor kare ,
aise bano jo vakt ko jhukane pe majaboor kare !

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Maya Mnazil
maya.manjil@gmail.com

Wakt Ke Hatho


वक़्त के हाथो कभी मजबूर न बनने दो ,
मजबूरी को ये खबर न होने दो ,
वक़त को अपनी मुट्ठी में रहने दो ,
तक़दीर को कभी ये अहसास ना होने दो !

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वक़त वो है जो कभी रुकता नहीं,
लहरे वो है जो कभी ठहरती नहीं ,
समंदर वो है जो कभी सूखता नहीं ,
हम वो ह जो मंजिल में मुड़कर देखते नहीं !

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पत्थर की लकीर को तक़दीर ना कहो ,
किसी की बेबशी को मज़बूरी ना कहो,
जीने के अंदाज को चलन ना कहो,
अगर जीन्दगी में कुछ पाना हैं तो,
वक़्त के बदलाव को कुछ ना कहो.

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Maya Manzil
maya.manjil@gmail.com